CUET UG 2025 Hindi Previous Year Solved Paper

CUET UG 2025 Hindi previous year paper with easy solutions. This page keeps the original questions and presents student-friendly explanations in a clean table format for quick revision, practice, and topic-wise mock preparation.

Subject: Hindi
Year: 2025
Questions extracted: 49
Source format: previous year paper PDF with solution section

Student-Friendly Solutions Table

Each question is shown with its original wording from the source paper and an easier explanation designed for quick understanding.

Q.No. Question Easy Solution
1Q.1. गद्यांश के अिुसयर िीवि में सफितय कय अत्यांत महत्वपूर्ण उपकरर् है –
1. नैलतकता
2.पररश्रम
3. लिक्षा
4. अनुिासन

wer: (3) लिक्षा
1. र्द्याोंि की पहली पोंक्ति कहती है — “जीवन में सफलता प्राप्त करने के ललए लिक्षा
बहुत महत्वपूर्ण उपकरर् है।”
2. इससे स्पष्ट है लक सफलता के ललए सबसे आवश्यक साधन “लिक्षा” है।

2Q.2. ग्रयमीर् क्षेत्ोां में सरकयर द्वयरय नशक्षय को कैसे बढ़यवय नदयय िय रहय है ?
Previous Years' Paper
Common University Entrance Test for UG Programmes
Entrance Exam, 2025
CUET-UG - Hindi
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1. लवद्यालय ख लकर
2. जार्रुकता अलर्यान चलाकर
3. र जर्ार के अवसर देकर
4. दूरस्थ लिक्षा के माध्यम से

wer: (2) जार्रुकता अलर्यान चलाकर
1. र्द्याोंि में उल्लेख है — “ग्रामीर् क्षेत् ों में लिक्षा क बढावा देने के ललए सरकार द्वारा
बहुत से जार्रुकता अलर्यान चलाये जा रहे हैं।”
2. इसललए सही उत्तर “जार्रुकता अलर्यान चलाकर” है।

3Q.3. गद्यांश के अिुसयर आि कय युग नकस प्रकयर कय है?
1. चुनौलतय ों से र्रा
2. आधुलनक युर्
3. वैज्ञालनक और तकनीकी युर्
4. प्राचीन युर्

wer: (3) वैज्ञालनक और तकनीकी युर्
1. र्द्याोंि में ललखा है — “आज के वैज्ञालनक एवों तकनीकी युर् में लिक्षा की अहम
र्ूलमका है।”
2. अतः यह युर् “वैज्ञालनक और तकनीकी” कहलाता है।

4Q.4. गद्यांश में प्रयुक्त अपिे पैरोां पर िडय होिय वयक्यांश कय क्य अर्ण है?
1. कौिलपरक लिक्षा प्राप्त कर लेना
2. दूरस्थ लिक्षा का लार् उिाना
3. लवज्ञान और तकनीक से जुडना
4. आत्मलनर्णर बनना
निम्ननिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधयररत अगिे चयर प्रश्ोां के उत्तर दीनिये –
नाटक की तरह एकाोंकी में चररत् अलधक नहीों ह ते। यहाँ पाोंच-छह से अलधक चररत् नहीों ह ते
। चररत् ों में र्ी केवल नायक की प्रधानता रहती है, अन्य चररत् उसके व्यक्तित्व क अग्रसर
करते हैं । यहाँ प्रलतनायक की कल्पना सामान्यतः नहीों रहती। नायक स्वये अपने उत्थान पतन
के ललए उत्तरदायी है। एकाकी में लवदूषक की कल्पना नहीों की जाती, क् ोंलक एकाोंकी की
कथावस्तु में इसके ललए स्थान ही नहीों ह ता । हास्य, व्योंग्य और लवन द का काम उसके चररत् ों
के सोंवाद ों से ही चल जाता है। एकाोंकी के चररत् क सजीव, व्यक्तिवादी और प्रर्ाविाली
ह ना चालहए। यहाँ चररत् एक ऐसा लबोंदु है, ज अपने चार ों ओर वृत्त या घेरा बनाता जाता है।
अतएव, घटनाओों के उत्थान-पतन की क ई आवश्यकता नहीों पडती। चररत् का लनमाणर्
उसके सोंस्कार, मन लवज्ञान और वातावरर् के अनुसार ह ता है। प्राचीन नाटक ों की तरह यहाँ

नायक या पात् ों का क ई बना बनाया साँचा नहीों ह ता। नायक के ललए सवणर्ुर्सोंपन्न ह ना र्ी
आवश्यक नहीों । वह त एक साधारर् व्यक्ति है, ज साधारर् ल र् ों की तरह सुख-दुःख के
बीच जीवन लबताता है। अलधकतर एकाोंलकय ों में चररत् की मानलसक क्तस्थलत द्वोंद्वात्मक ह ती है ।
उसे अोंतद्वणन्द्द्व और बाह्यद्वोंद्व से सोंघषण करता हुआ लदखाया जाता है।

wer: (4) आत्मलनर्णर बनना
1. “अपने पैर ों पर खडा ह ना” का सामान्य अथण ह ता है — लकसी और पर लनर्णर हुए
लबना स्वयों के बल पर जीवनयापन करना।

2. र्द्याोंि में र्ी कहा र्या है लक “कौिल ों में दक्षता प्राप्त कर व्यक्ति कम समय में ही
अपने पैर ों पर खडा ह सकता है” — अथाणत वह आत्मलनर्णर बन सकता है।

5Q.5. 'कल्पिय शब्द में सांज्ञय कय भेद बतयइये.
1. व्यक्तिवाचक
2. पुरुषवाचक
3. जालतवाचक
4. र्ाववाचक

wer: (4) र्ाववाचक
1. र्ाववाचक सोंज्ञा वह ह ती है ज लकसी र्ुर्, र्ाव या अवस्था का ब ध कराए — जैसे
“सुोंदरता, चालाकी, कल्पना, प्रेम”।
2. “कल्पना” का अथण है — लकसी चीज़ की मन में कक्तल्पत (स ची हुई) रूपरेखा या
लवचार।
3. यह लकसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम नहीों है, बक्तल्क एक र्ाव या लिया की
अवस्था क दिाणता है।

6Q.6. गद्यांश के अिुसयर कौि सी नवशेषतय एकयांकी के चररत् से सम्बांनधत िहीां है ?
1. सजीव
2. व्यक्तिवादी
3. प्रर्ाविाली
4. सवणर्ुर्सोंपन्न

wer: (4) सवणर्ुर्सोंपन्न
1. र्द्याोंि में कहा र्या है — “नायक के ललए सवणर्ुर्सोंपन्न ह ना र्ी आवश्यक नहीों।
वह एक साधारर् व्यक्ति है।”
2. इसका अथण है लक “सवणर्ुर्सोंपन्न” ह ना एकाोंकी के चररत् की लविेषता नहीों है।

7Q.7. गद्यांश के अिुसयर चररत् निमयणर् के निए इिमें से क्य आवश्यक िहीां है ?
1. सोंस्कार
2. मन लवज्ञान
3. वातावरर्
4. घटनाओों का उत्थान-पतन
निम्ननिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधयररत अगिे चयर प्रश्ोां के उत्तर दीनिये –
बार-बार आती है मुझक मधुर याद बचपन तेरी
र्या ले र्या तू जीवन की सबसे मस्त खुिी मेरी।
लचोंता रलहत खेलना खाना वह लफरना लनर्णय स्वच्छोंद।

कैसे र्ूला जा सकता है बचपन का अतुललत आनोंद ?
ऊोंच-नीच का ज्ञान नहीों था छुआ छूत लकसने जानी ?
बनी हुई थी वहाों पडी और चीड ों में रानी।
र ना और मचल जाना र्ी क्ा आनोंद लदखाते थे।
बडे-बडे म ती से आाँसू जयमाला पहनाते थे।
वह सुख का साम्राज्य छ डकर मैं मतवाली बडी हुई।
लुटी हुई,कुछ िर्ी हुई-सी दौड द्वार पर खडी हुई।
Question Number (8 to 11)

wer: (4) घटनाओों का उत्थान-पतन
1. र्द्याोंि में ललखा है — “अतः घटनाओों के उत्थान-पतन की क ई आवश्यकता नहीों
पडती।”
2. यानी चररत् लनमाणर् में यह जरूरी नहीों है, बक्तल्क चररत् स्वयों अपने व्यक्तित्व से कथा
क आर्े बढाता है।

8Q.8. उपयुक्त पांखक्तयोां में कवनयत्ी िीवि की सबसे अच्छी िुनशयोां को िे ियिे कय
उत्तरदययी नकसे मयिती है ?
1. लचोंता
2. युवावस्था
3. बचपन
4. जावन सोंघषण

wer: (3) बचपन

1. पोंक्तियाँ — “र्या ले र्या तू जीवन की सबसे मस्त खुिी मेरी” — स्पष्ट रूप से
“बचपन” की ओर सोंकेत करती हैं।
2. कवलयत्ी कहती हैं लक बचपन के जाने से जीवन की सबसे मधुर खुिी चली र्ई।

9Q.9. कवनयत्ी िे बचपि के अतुनित आिांद के रूप में इिमें से नकसे ययद िहीांनकयय है ?
1. लचोंता मुि िीडा
2. लनर्णय स्वच्छोंद लवचरर्
3. ऊोंच-नीच का र्ेद ज्ञान
4. अर्ाव में दुःख की अनुर्ूलत

wer: (4) अर्ाव में दुःख की अनुर्ूलत
1. कवलयत्ी ने बचपन के आनोंद में “लचोंता रलहत खेलना-खाना”, “लनर्णय स्वच्छोंद
लफरना” और “ऊोंच-नीच का ज्ञान नहीों” जैसी बातें कही हैं।
2. “अर्ाव में दुःख की अनुर्ूलत” का उल्लेख कहीों नहीों है — इसललए यह सही उत्तर
है।

10Q.10. 'छुआ छूत' में कौि सय समयस है ?
1. लद्वर्ु
2. द्वोंद्व

3. कमणधारय
4. अव्ययी र्ाव

wer: (2) द्वोंद्व समास
1. “छुआ” और “छूत” — द न ों िब्द समान श्रेर्ी के हैं और द न ों लमलकर एक नया
अथण देते हैं।
2. द्वोंद्व समास में द न ों पद समान रूप से महत्त्वपूर्ण ह ते हैं (जैसे “राम-लक्ष्मर्”, “लदन-
रात”)।
3. अतः “छुआ-छूत” द्वोंद्व समास का उदाहरर् है।

11Q.11. उपयुणक्त पद्यांश कय इिमें से सवयणनधक उनचत शीषणक होगय –
1. मेरा बचपन
2. बीता हुआ समय
3. मेरी स्मृलतयाँ
4. जीवन का आनोंद

wer: (1) मेरा बचपन
1. पूरी कलवता में कवलयत्ी अपने बचपन की स्मृलतय ों क याद कर रही हैं।
2. उन् ोंने बचपन की लचोंतामुि, आनोंदमयी अवस्था क याद लकया है और युवावस्था
की तुलना में उसे श्रेष्ठ बताया है।
3. इसललए सबसे उपयुि िीषणक “मेरा बचपन” है।

12Q.12. 'अपिय उल्लू सीधय करिय' मुहयवरे कय अर्ण है –
1. धूतणता करना
2. अपना काम लनकालना
3. लकसी क िर्ना
4. अपनी बडाई स्वयों करना

wer: (2) अपना काम लनकालना
1. “अपना उल्लू सीधा करना” मुहावरा उस व्यक्ति के ललए कहा जाता है ज
केवल अपना फायदा देखता है।
2. इसका अथण है — अपनी स्वाथण लसक्तद्ध करना या अपना काम लनकाल लेना, चाहे
दूसर ों का नुकसान ही क् ों न ह ।
3. उदाहरर्:
• “वह हर काम में अपना उल्लू सीधा करता है।” — अथाणत् हर पररक्तस्थलत में
अपने लहत की स चता है।

13Q.13. 'अपरयधी सदैव सशांनकत रहतय है। इस अर्ण के निए इिमें से कौि सी िोकोखक्त
उपयुक्त है?
1. च री का माल म री में।
2. च र च र मौसरे र्ाई ।
3. च र की दाढी में लतनका ।
4. च र साह से कहे जार्ते रह ।

wer: (3) च र की दाढी में लतनका
1. यह ल क क्ति उस व्यक्ति पर लार्ू ह ती है ज लकसी अपराध या र्लती के कारर्
र्ीतर से डरता है।
2. “च र की दाढी में लतनका” का अथण है — लजसने च री की है, वही सबसे अलधक
घबराया रहता है; यानी अपराधी क अपने लकए का र्य हमेिा रहता है।
3. वाक्-प्रय र्: जब बात च री की चली त वही व्यक्ति सबसे अलधक डरने लर्ा —
सच है, च र की दाढी में लतनका!

14Q.14. निम्ननिखित में से 'प्र' उपसगण सेनिनमणत शब्द िहीां हैं –
(A) प्रकाि
(B) प्रलतकूल
(C) प्रख्यात

(D) प्रत्यक्ष
(E) प्रबल
िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुिें :
1. केवल (B),(C) और (D)
2. केवल (A) और (C)
3. केवल (B) और (C)
4. केवल (B) और (D)

wer: (4) केवल (B) और (D)
1. ‘प्र’ उपसगण वयिे शब्द वे ह ते हैं ज मूल िब्द के आर्े ‘प्र’ ज डने से बनते हैं —
जैसे प्र + बल = प्रबल, प्र + ख्यात = प्रख्यात, प्र + काि = प्रकाि।
2. अब प्रत्येक िब्द क देखें:
• (A) प्रकयश → प्र + काि → “प्र” उपसर्ण है
• (B) प्रनतकूि → प्रत् + कूल → यहाँ उपसर्ण ‘प्रत्’ है ❌

• (C) प्रख्ययत → प्र + ख्यात → “प्र” उपसर्ण है
• (D) प्रत्यक्ष → प्रत् + अक्ष (→ त्यक्ष) → यहाँ उपसर्ण ‘प्रत्’ है ❌
• (E) प्रबि → प्र + बल → “प्र” उपसर्ण है
3. अतः “प्र” उपसर्ण से निनमणत िहीां हैं — (B) प्रनतकूि और (D) प्रत्यक्ष।

15Q.15. इिमें से कौि सय शब्द 'ई प्रत्यय से निनमणत िहीां है –
(A) खुजली
(B) हररयाली
(C) सरकारी
(D) हलवाई
(E) अोंर्ूिी
िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुिें :
1. केवल (A) और (B)
2. केवल (A),(B) और (C)
3. केवल (C) और (D)
4. केवल (D) और (E)

wer: (3) केवल (C) और (D)
1. ‘ई’ प्रत्यय वे िब्द हैं ज लकसी मूल िब्द के साथ ‘ई’ िोडिे से बिे होां, जैसे – खुज
+ ई = खुजली, अोंर्ूि + ई = अोंर्ूिी।
2. अब एक-एक िब्द देखें 👇
• (A) िुििी → खुज + ई → ‘ई’ प्रत्यय से बना
• (B) हररययिी → हररयाल + ई → ‘ई’ प्रत्यय से बना
• (C) सरकयरी → सरकार + ई नहीों, बक्तल्क सरकार + ई लविेषर् रूप है,
यह ‘ई’ प्रत्यय से नहीों बना ❌
• (D) हिवयई → यह हलवा + ई नहीों बक्तल्क हलवा बनाने वाला व्यक्ति के अथण
में तद्भव रूप है, इसमें ‘ई’ प्रत्यय नहीों है ❌
• (E) अांगूठी → अोंर्ूि + ई → ‘ई’ प्रत्यय से बना
3. अतः ‘ई’ प्रत्यय से निनमणत िहीां हैं — (C) सरकयरी और (D) हिवयई।

16Q.16. निम्ननिखित शब्दोां में से गुर्वयचक नवशेषर् कय उदयहरर् िहीां हैं –
(A) वतणमान
(B) र्ारतीय
(C) सुनहरा

(D) तीसरा
(E) बहुत
िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुिें :
1. केवल (A), (B) और (D)
2. केवल (B), (C) और (D)
3. केवल (C) और (D)
4. केवल (D) और (E)

wer: (4) केवल (D) और (E)
1. गुर्वयचक नवशेषर् वे ह ते हैं ज लकसी सोंज्ञा के र्ुर्, रूप, रोंर्, अवस्था या
प्रकृलत क बताते हैं — जैसे सुोंदर, मीिा, लाल, सुनहरा।
2. अब प्रत्येक िब्द क देखें 👇

• (A) वतणमयि → वतणमान समय (समय का अवस्था-सूचक र्ुर्) ⇒ र्ुर्वाचक

• (B) भयरतीय → र्ारत से सोंबोंलधत व्यक्ति ⇒ जालतवाचक लविेषर् र्ी
र्ुर्वाचक के अोंतर्णत आता है
• (C) सुिहरय → “स ने जैसा” रोंर् बताता है ⇒ र्ुर्वाचक
• (D) तीसरय → िम बताता है ⇒ यह सांख्ययवयचक नवशेषर् है ❌
• (E) बहुत → पररमार् बताता है ⇒ यह पररमयर्वयचक नवशेषर् है ❌
3. इसललए (D) तीसरय और (E) बहुत र्ुर्वाचक लविेषर् नहीों हैं।

17Q.17. 'सूिी िगह में भय िगतय ही है।' वयक् में नवशेष्य की पहचयि कीनिये
1. सुनी
2. जर्ह
3. र्य
4. लर्ता

wer: (2) जर्ह
1. नवशेष्य वह िब्द ह ता है लजसकी लविेषता क ई लविेषर् बताता है।
2. वाक् में “सूनी जर्ह” कहा र्या है — यहाँ ‘सूिी’ लविेषर् है, ज “जर्ह” की
लविेषता बता रहा है।
3. इसललए “जर्ह” वह िब्द है निसकी नवशेषतय बतयई गई है, यानी वही नवशेष्य है।

18Q.18. 'ििि शब्द कय एक अर्ण िहीां है –
1. अमृत
2. म ती
3. चन्द्रमा
4. कमल

wer: (1) अमृत
1. “जलज” िब्द सोंस्कृत मूल का है — ‘जल’ (पानी) + ‘ज’ (जन्मा हुआ) = “ज जल में
उत्पन्न हुआ”।
2. इसललए “जलज” का अथण ह ता है —
• कमि (ज जल में जन्मता है)
• मोती (ज सीप में जल से बनता है)
• चन्द्रमय (काव्य में उपमान के रूप में जल से उत्पन्न माना र्या)
3. लेलकन अमृत जल में जन्मा नहीों है, इसललए इसका अथण “अमृत” नहीों ह ता। ❌

19Q.19. 'मेरी घडी िो गयी।' वयक् में कौि सय कयरक है ?
1. कमण कारक
2. सम्बन्ध कारक
3. करर् कारक
4. सम्प्रदान कारक

wer: (2) सम्बन्ध कारक
1. कयरक वाक् में सोंज्ञा या सवणनाम और लिया के बीच सोंबोंध लदखाता है।
2. यहाँ “मेरी” िब्द “घडी” से सोंबोंध लदखा रहा है — “लकसकी घडी?” → मेरी ।
3. “लकसकी?” यह प्रश्न सम्बन्ध कयरक (षष्ठी कयरक) का ह ता है।

20Q.20. निम्ननिखित में से सकमणक नियय कय उदयहरर् िहीां है –
(A) वह तुम्हें लजा रही है।
(B) मैं घडा र्रता हाँ।
(C) र्ाडी चली ।
(D) लवपदा मुझे डराती है।
(E) चुनमुन राता है।
िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुिें:
1. केवल (A) और (B)
2. केवल (B) और (C)
3. केवल (D) और (E)
4. केवल (C) और (E)

wer: (4) केवल (C) और (E)
1. सकमणक नियय वह ह ती है लजसके साथ कमण (object) की आवश्यकता ह ती है —
जैसे “मैं पानी पीता हाँ।” (पानी = कमण)।
2. अकमणक नियय वह ह ती है लजसमें कमण नहीों ह ता, केवल कताण और लिया ह ती है
— जैसे “र्ाडी चली।”
अब देिें —
• (A) वह तुम्हें ििय रही है। → “तुम्हें” = कमण → सकमणक
• (B) मैं घडय भरतय हूँ। → “घडा” = कमण → सकमणक
• (C) गयडी चिी। → क ई कमण नहीों → अकमणक ❌
• (D) नवपदय मुझे डरयती है। → “मुझे” = कमण → सकमणक
• (E) चुिमुि गयतय है। → “क्ा र्ाता है?” — यहाँ कमण नहीों बताया र्या
→ अकमणक ❌
3. अतः सकमणक नियय के उदयहरर् िहीां हैं (C) गयडी चिी और (E) चुिमुि गयतय
है।

21Q.21. 'चर शब्द कय समयियर्ी िहीां है –
1. जासूस
2. पुराना
3. दूत
4. नौकर

wer: (2) पुराना
1. “चर” िब्द के सामान्य अथण हैं —

• ियसूस (ज जानकारी लेने जाता है)
• दूत (ज सोंदेि पहुाँचाता है)
• िौकर (ज काम करता है या सेवा करता है)
2. “पुराना” िब्द का अथण “चर” से सोंबोंलधत नहीों है।
3. इसललए “पुराना” समयियर्ी िहीां है।

22Q.22. 'मैं अभी-अभी आयय हूँ वयक् में अव्यय कय कौि सय भेद है?
1. क्तस्थलतसूचक
2. स्थानवाचक
3. कालवाचक
4. रीलतवाचक

wer: (3) कालवाचक
1. अव्यय वह िब्द ह ता है ज रूप न बदलने पर र्ी वाक् में अथण पूरा करता है (जैसे:
अर्ी, वहाँ, बहुत, कल)।
2. यहाँ “अर्ी-अर्ी” समय (Time) क दिाण रहा है — कब आया हाँ? → अभी-अभी।
3. ज अव्यय समय या काल का ब ध कराए, उसे कयिवयचक अव्यय कहते हैं।
Q.23
Answer: (1) (A) - (I), (B) - (II), (C) - (III), (D) - (IV)
1. दीघण सांनध (A → I)
• जब द समान स्वर (अ + अ, इ + इ, उ + उ) लमलते हैं, त वे दीघण ह जाते
हैं।
• महा + इन्द्र = महेन्द्र → अ + इ से ए बना (दीघण सोंलध)।
2. गुर् सांनध (B → II)
• जब इ/ई या उ/ऊ के बाद अ, आ, इ, ई, उ, ऊ आता है त र्ुर् रूप ह ता है।
• मही + इन्द्र = महीन्द्र → ई + इ से ई बना (र्ुर् सोंलध)।
3. यर् सांनध (C → III)
• जब इ, ई, उ, ऊ के बाद स्वर आता है त िमिः य, व लर् जाता है।

• िे + अन = ियन → ए + अ से य आया (यर् सोंलध)।
4. अययनद सांनध (D → IV)
• लविेष लनयम: इ/ई/ऐ के बाद अन्य स्वर आने पर उनके स्थान
पर अय या एय आता है।
• अनु + अय = अन्य → यह अयालद सोंलध का उदाहरर् है।

23Q.23. सूची-1 को सूची ॥ से सुमेनित कीनिए:


िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुनिए :
1. (A) - (I), (B) - (II), (C) - (III), (D) - (IV)
2. (A) – (II), (B) - (I), (C) - (V), (D) - (III)
3. (A) - (III), (B) - (II), (C) - (I), (D)- (IV)
4. (A)- (IV), (B) - (I), (C) - (III), (D) - (I)

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24Q.24. 'अत्युत्तम' कय सही सांनध नवच्छेद है ?
1. अत्य + उत्तम
2. अत्या + उत्तम
3. अलत उत्तम
4. अती उत्तम

wer: (1) अत्य + उत्तम
1. मूल िब्द हैं — अनत + उत्तम।
2. यहाँ इ (अलत) + उ (उत्तम) के लमलने पर “यर् सांनध” ह ती है —
इ + उ → यु
3. इसललए “अलत + उत्तम” = अत्युत्तम।
4. इस प्रकार सोंलध-लवच्छेद ह र्ा — अत्य + उत्तम।

25Q.25. "मूक होइ बयचयि, पांगु चढ़इ नगरर बर गहि I
ियसु कृपयूँ सो दययिु द्रवउ सकि कनि मि दहि ।
" उपयुणक्त पांखक्तयोां में कौि सय छांद है ?
1. द हा
2. स रिा
3. छप्पय
4. चौपाई

wer: (1) द हा
1. यह पोंक्तियाँ रामचररतमानस की आरोंलर्क चौपाईय ों में से हैं, लेलकन इनकी रचना–
िैली दोहय छांद में है।
2. दोहय छांद की नवशेषतय:
• द पोंक्तियाँ ह ती हैं (पहली व दूसरी पोंक्ति)।
• पहली पोंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्ाएाँ।
• दूसरी पोंक्ति में र्ी 13 + 11 = 24 मात्ाएाँ ह ती हैं।
3. यलद हम इस पोंक्ति क त डकर लर्नें —
मूक होइ बयचयि, पांगु चढ़इ नगरर बर गहि → 24 मात्ाएाँ
ियसु कृपयूँ सो दययिु द्रवउ सकि कनि मि दहि → 24 मात्ाएाँ

4. इसललए यह छोंद दोहय है।

26Q.26. सूची-1 को सूची ॥ से सुमेनित कीनिए:

िीचे नदए गएनवकल्पोां में से सही उत्तर चुनिए:
1. (A) - (I), (B) - (II), (C) - (IV), (D) - (III)
2. (A) - (I), (B) - (II), (C) - (III), (D) - (IV)
3. (A)- (II), (B) (I), (C) - (III), (D) - (IV)
4. (A)- (II) (B) (I), (C) - (IV),), (D) - (III)

wer: (1) (A) - (I), (B) - (II), (C) - (IV), (D) - (III)
1. (A) नचडीमयर → तत्पुरुष समयस
• “लचडी + मार” (लचलडय ों क मारने वाला) → कमणधारय तत्पुरुष समास।
2. (B) परोक्ष → अव्ययीभयव समयस
• “पर + अक्ष” → ‘अक्ष से परे’ = अव्ययीर्ाव (अथण प्रधान)।
3. (C) आिकि → द्वांद्व समयस
• “आज और कल” द न ों समान पद हैं → द्वोंद्व समास।
4. (D) कमििेत् → बहुव्रीनह समयस
• “कमल के समान नेत् वाला” → लजसके नेत् कमल जैसे ह ों = बहुव्रीलह
समास।

27Q.27. 'चन्द्रबदि' शब्द में कौि सय समयस है ?
1. बहुब्रीलह समास
2. कमणधारय समास
3. तत्पुरुष समास
4. अव्ययीर्ाव समास

wer: (1) बहुव्रीलह समास
1. “चन्द्रबदन” = चन्द्र जैसा बदन (मुख) — अथाणत “लजसका मुख चन्द्र जैसा है।”
2. इस प्रकार “चन्द्र” और “बदन” द न ों िब्द लमलकर लकसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का
र्ुर् बताते हैं, जैसे — चन्द्रबदन नारी।
3. बहुव्रीनह समयस में यही लविेषता ह ती है —
→ द िब्द लमलकर लकसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का ब ध कराते हैं, न लक अपने
आप का।
उदाहरर्:
• पीताम्बर (लजसका अम्बर पीला है)
• कमलनयन (लजसकी आाँखें कमल जैसी हैं)

28Q.28. सूची-1 को सूची ॥ से सुमेनित कीनिए :


िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुनिए
1. (A) - (I), (B) - (III), (C) - (IV), (D) - (II)
2. (A) - (IV), (B) - (III), (C) - (II), (D) - (I)
3. (A) - (III), (B) - (II), (C) - (IV), (D) - (I)
4. (A) - (IV), (B) - (I), (C) - (III), (D) - (II)

wer: (1) (A) - (I), (B) - (III), (C) - (IV), (D) - (II)
1. (A) आूँिें िुििय → (IV) सिग होिय
• अथण: सच का ज्ञान ह ना या लकसी बात की समझ आ जाना।
• उदाहरर्: र्लती ह ने के बाद उसकी आाँखें खुलीों।
2. (B) िूि सफेद हो ियिय → (I) बहुत डर ियिय
• नहीों! इसका अथण है — लनदणयी या लनष्िुर ह जाना, पर यहाँ लदए लवकल्प ों में
लनकटतम समानाथण “बहुत डर जाना” नहीों बक्तल्क मनुष्यत्व ख देना ह ता।
• पर लदए र्ए मेल में सही अथण उपलब्ध नहीों है, लफर र्ी सूची में सबसे समीप
“(I)” लदया र्या है।
लेलकन सोंदर्ण से सही समन्वय:
• (B) िूि सफेद हो ियिय → (IV) सिग होिय ❌ नहीों सही; बक्तल्क
“लनदणयी ह जाना” — यहाँ लवकल्प नहीों है, पर प्रश्न के लदए र्ए सोंय जन के
अनुसार “(III)” प्रनतज्ञय करिय र्ी नहीों बनता।
• इसललए सही सोंय जन के ललए नीचे देखें:
3. (C) कयि पकडिय → (III) प्रनतज्ञय करिय
• अथण: र्लती न द हराने की प्रलतज्ञा करना।
• उदाहरर्: उसने र्लवष्य में ऐसी र्ूल न करने की िान ली — कान पकड
ललए।
4. (D) किेिय ठांडय होिय → (II) सन्तोष होिय
• अथण: मन की िाोंलत या तृक्तप्त प्राप्त ह ना।
• उदाहरर्: बदला लेने के बाद उसका कलेजा िोंडा हुआ।

29Q.29. निम्ननिखित में से शब्दयिांकयर कय भेद िहीां है –
(A) अनुप्रास
(B) श्लेष
(C) उपमा
(D) रूपक
(E) उत्प्रेक्षा
ियच नदए गए नवकल्पय में से सहय उत्तर चुि:
1. केवल (A), (B) और (D)
2. केवल (A), (B) और (C)
3. केवल (C), (D) और (E)
4. केवल (B), (C) और (D)

wer: (C) उपमा
1. अिांकयर दो प्रकयर के होते हैं:
• शब्दयिांकयर – जहाँ सौोंदयण िब्द ों की रचना या ध्वलन में ह ता है।
• अर्यणिांकयर – जहाँ सौोंदयण अथण या र्ाव में ह ता है।
2. शब्दयिांकयर के प्रमुि प्रकयर हैं:
• अनुप्रास (एक ही अक्षर की पुनरावृलत्त)
• श्लेष (एक िब्द के अनेक अथण)
3. अर्यणिांकयर के प्रमुि प्रकयर हैं:
• उपमा (समानता द्वारा तुलना) ❌
• रूपक (प्रत्यक्ष समानता) ❌
• उत्प्रेक्षा (सोंर्ावना पर आधाररत तुलना) ❌
4. प्रश्न में पूछा र्या है — “िब्दालोंकार का र्ेद नहीों है।”
इसललए सही उत्तर है उपमय, क् ोंलक यह अथाणलोंकार है।

30Q.30. सूची - को सूची ॥ से सुमेनित कीनिए:


िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुनिए:
1. (A) - (I), (B) - (II), (C) - (III), (D) - (IV)
2. (A) - (I), (B) - (III), (C) – (II), (D) - (IV)
3. (A) - (II), (B) - (I), (C) – (IV), (D) - (III)
4. (A) - (III), (B) - (IV), (C) - (I), (D) - (II)

wer: (3) (A) - (II), (B) - (I), (C) - (IV), (D) - (III)
1. (A) रौद्र रस → (II) िोध
• जब व्यक्ति ि ध से र्र जाता है त रौद्र रस उत्पन्न ह ता है।
• उदाहरर्: युद्ध में रावर् का रौद्र रूप।
2. (B) वीर रस → (I) उत्सयह
• िौयण, परािम और साहस के र्ाव से वीर रस उत्पन्न ह ता है।
• स्थायी र्ाव = उत्साह

3. (C) भययिक रस → (IV) भय
• डर या र्य से उत्पन्न रस क र्यानक रस कहते हैं।
• स्थायी र्ाव = र्य
4. (D) बीभत्स रस → (III) िुगुप्सय
• घृर्ा या लवतृष्णा की र्ावना से बीर्त्स रस उत्पन्न ह ता है।
• स्थायी र्ाव = जुर्ुप्सा

31Q.31. 'वीर तुम बढ़े चिो,धीर तुम बढ़े चिो।
सयमिे पहयड हो नक नसांह की दहयड हो।'
उपयुणक्त पांखक्तयोां में कौि सय रस है?
1. रौद्र रस
2. वीर रस
3. र्यानक रस
4. अद्र्ुत रस

wer: (2) वीर रस
1. इन पोंक्तिय ों में कलव साहस, दृढता और लनर्णयता की र्ावना प्रकट कर रहा है।
2. “पहाड ह या लसोंह की दहाड” — इनसे र्य या रुकावट का नहीों,
बक्तल्क सयहसपूवणक आगे बढ़िे कय उत्सयह झलकता है।
3. ऐसा उत्साह, ज कलिन पररक्तस्थलतय ों में र्ी आर्े बढने की प्रेरर्ा दे, वीर
रस कहलाता है।
4. वीर रस कय थर्ययी भयव: उत्साह।

32Q.32. 'अनधगम्य' कय उनचत नविोम शब्द है –
1. ब धर्म्य
2. अनलधर्म्य
3. प्रलतर्म्य
4. अर्म्य

wer: (2) अनलधर्म्य
1. ‘अनधगम्य’ िब्द का अथण है — लजसे जाना या प्राप्त लकया जा सके।
• अलध + र्म् + य = “लजस तक पहुाँचा जा सके।”
2. इसका लवल म वह ह र्ा — लजसे जाना या प्राप्त न लकया जा सके।
3. ‘अिनधगम्य’ = “ज अलधर्म्य नहीों है” (अथाणत लजसे जाना न जा सके)।
4. अन्य लवकल्प:
• (1) बोधगम्य = ज समझ में आए — समानाथी है, लवल म नहीों। ❌

• (3) प्रनतगम्य = लौटने य ग्य — अथण लर्न्न। ❌
• (4) अगम्य = जहाँ पहुाँचा न जा सके — आोंलिक रूप से समान, पर
‘अलधर्म्य’ का सटीक लवल म अिनधगम्य ही है।

33Q.33. निम्ननिखित में से आद्रण शब्द कय उनचत नविोम शब्द िहीांहै –
1. िुष्क
2. अनाद्रण
3. सूखा
4. सजल

wer: (4) सजल
1. ‘आद्रण’ का अथण है — र्ीला, नम या सीलनयुि।
2. इसका लवल म ह र्ा — सूखा या िुष्क।
3. लवकल्प ों का अथण देखें:
• (A) शुष्क → सूखा — लवल म है
• (B) अियद्रण → ज आद्रण न ह — लवल म है
• (C) सूिय → र्ीले का लवपरीत — लवल म है
• (D) सिि → जल से र्रा, नम — आद्रण का समानाथी, नविोम िहीां ❌

34Q.34. निम्ननिखित में से कौि सय शब्द तत्सम स्त्रीनिांग शब्द िहीांहै –
1. लिक्षा
2. आयु
3. लनमोंत्र्
4. वस्तु

wer: (3) लनमोंत्र्
1. तत्सम शब्द वे हैं ज सोंस्कृत से लबना रूप बदले लहोंदी में आए हैं।
2. स्त्रीनिांग तत्सम शब्द वे ह ते हैं लजनका ललोंर् स्त्रीललोंर् ह ता है।
3. अब देखें —
• (A) नशक्षय → स्त्रीललोंर् तत्सम िब्द
• (B) आयु → स्त्रीललोंर् तत्सम िब्द
• (C) निमांत्र् → पुक्तल्लोंर् िब्द (लनमोंत्र् देना, एक लनमोंत्र् लमला) ❌
• (D) वस्तु → स्त्रीललोंर् तत्सम िब्द
4. अतः “लनमोंत्र्” तत्सम तो है, परोंतु स्त्रीनिांग िहीां — यह पुखल्लांग शब्द है।

35Q.35. इिमें से एकवचि कय उदयहरर् है –
1. हरर तुम्हारे मामा हैं।
2. श्याम और हररके नाना आए हैं।
3. यह साधुओों का समाज है।
4. दयालु आए।

wer: (3) यह साधुओों का समाज है।
1. एकवचि = जब लकसी एक व्यक्ति, वस्तु या समूह की बात ह ।
2. बहुवचि = जब एक से अलधक की बात ह ।
3. अब वाक् देखें 👇
• (A) हरर तुम्हारे मामा हैं → “हैं” = बहुवचन लिया रूप ❌
• (B) श्याम और हरर के नाना आए हैं → “श्याम और हरर” द व्यक्ति →
बहुवचन ❌
• (C) यह साधुओों का समाज है → “समाज” एक समूह का नाम है, और लिया
“है” = एकवचन
• (D) दयालु आए → “आए” बहुवचन लिया रूप ❌
4. इसललए एकवचन वाक् है — “यह सयधुओां कय समयि है।”

36Q.36. इिमें से 'मुि' कय पययणयवयची शब्द िहीां है –
1. आनन
2. बदन
3. सकल
4. मुाँह

wer: (3) सकल
1. ‘मुि’ का अथण है — चेहरा या मुाँह।
2. इसके सामान्य पययणयवयची शब्द हैं —
• आनन
• बदन
• मुाँह
3. ‘सकि’ का अथण है — सम्पूर्ण, पूरा, सम्पूर्णता; यह मुख से सोंबोंलधत नहीों है। ❌

37Q.37. निम्ननिखित में से कौि सय शब्द 'चोर'कय पययणयवयची है?
1. र्लहणत
2. खनक
3. लवचरर्िील
4. िम्बर

wer: (4) िम्बर

1. ‘चोर’ का अथण है — ज च री करता है, अथाणत् दूसर ों की वस्तु लबना अनुमलत लेता
है।
2. अब लवकल्प ों का अथण देखें 👇
• (A) गनहणत → लनोंदनीय, द षपूर्ण ❌
• (B) ििक → झोंकार या ध्वलन ❌
• (C) नवचरर्शीि → घूमने वाला ❌
• (D) शम्बर → सोंस्कृत में च र, लुटेरा या डाकू के अथण में प्रयुि

38Q.38. निसकी पत्नी सयर् िहीां हो' वयक्यांश के निए उनचतएक शब्द है –
1. लवपत्नीक
2. लवय र्ी
3. लवधुर
4. एकाकी

wer: (1) लवपत्नीक
1. प्रश्न में कहा र्या है — “लजसकी पत्नी साथ नहीों ह ”।
इसका अथण है – पत्नी से लवयुि पुरुष।
2. अब लवकल्प ों का अथण देखें 👇
• (1) नवपत्नीक → लजसकी पत्नी साथ न ह
• (2) नवयोगी → ज लकसी से अलर् ह र्या ह (सामान्य अथण, लविेष रूप से
पत्नी के ललए नहीों) ❌
• (3) नवधुर → लजसकी पत्नी की मृत्यु ह चुकी ह (लसफण मृत्यु की क्तस्थलत में)

• (4) एकयकी → अकेला व्यक्ति ❌
3. यहाँ “साथ नहीों ह ” कहा र्या है, “मर र्ई ह ” नहीों — इसललए ‘नवपत्नीक’ सबसे
उपयुि िब्द है।

39Q.39. 'मधुकरी' शब्द इिमें से नकस वयक्यांश के निए प्रयुक्त होतय है ?
1. ज मधु से उत्पन्न हुआ ह ।
2. लजसे मन पलवत् मानता ह ।
3. केवल वषाण पर लनर्णर ।
4. पके हुए अन्नकी लर्क्षा।

wer: (4) पके हुए अन्न की लर्क्षा
1. ‘मधुकरी’ िब्द ‘मधुकर’ (र्ाँवरा) से बना है।

• र्ाँवरा फूल-फूल से थ डा-थ डा मधु लेकर जीवन यापन करता है।
2. उसी प्रकार सांत यय सयधु र्ी घर-घर जाकर थ डा-थ डा र् जन (लर्क्षा) लेते हैं —
इसे “मधुकरी लर्क्षा” कहा जाता है।
3. इसललए “मधुकरी” का अथण है — पके हुए अन्न की लर्क्षा लेना।

40Q.40. इिमें से कौि सय शब्द पक्ष कय एक अर्ण प्रकट िहीां करतय है?
1. पोंख
2. दल
3. कान
4. पखवाडा

wer: (3) कान
1. ‘पक्ष’ िब्द के कई अथण ह ते हैं —
• पांि (पक्षी का अोंर्)
• दि यय समूह (जैसे राजनीलतक पक्ष)
• पिवयडय (चोंद्र मास का आधा र्ार्)
2. अब देखें:
• (A) पांि → ‘पक्षी’ से सोंबोंध, पक्ष का अथण है
• (B) दि → ‘राजनीलतक पक्ष’ के रूप में अथण प्रकट करता है
• (C) कयि → ‘पक्ष’ से क ई सोंबोंध नहीों ❌
• (D) पिवयडय → ‘चोंद्र मास का पक्ष’ — सीधा सोंबोंध

41Q.41. 'अश्व शब्दकय समयियर्ी िहीां है –
1. मृर्राज
2. घ डा
3. तुरोंर्
4. घ टक

wer: (1) मृर्राज
1. ‘अश्व’ का अथण है — घ डा 🐎
2. इसके प्रमुख समयियर्ी शब्द हैं —
• घोडय
• तुरांग
• घोटक

3. ‘मृगरयि’ का अथण है — लसोंह (िेर) 🦁, ज “अश्व” से पूरी तरह लर्न्न है। ❌

42Q.42. अिांकयर के निम्ननिखित उदयहरर्ोां को अिुप्रयस, उपमय, रूपक और श्लेष के
िम में व्यवक्तस्थत कीलजए-

(A) तरलन तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए ।
(B) रलहमन पानी राक्तखए, लबन पानी सब सून । पानी र्एन ऊबरे, म ती, मानुस चून
(C) लसन्धु सा लवस्तृत और अथाह ।
(C) लसन्धु सा लवस्तृत और अथाह ।
िीचे नदए गए नवकल्पोां से सही उत्तर चुनिए –
1. (A), (C) (B), (D)
2. (A), (B), (C), (D)
3. (B), (A), (C), (D)
4. (A),(C), (D), (B)

wer: (4) (A), (C), (D), (B)
1. (A) तरनि तिूिय तट तमयि तरुवर बहु छयए।
• ‘त’ अक्षर की बार-बार पुनरावृलत्त है → अिुप्रयस अिांकयर
2. (C) नसन्धु सय नवस्तृत और अर्यह।
• “सा” िब्द द्वारा तुलना की र्ई है → उपमय अिांकयर
3. (D) (रूपक का उदाहरर् माना र्या है)
• रूपक में उपमेय और उपमान में र्ेद नहीों रहता, जैसे “तुम सूरज ह मेरे
जीवन के।” → रूपक अिांकयर
4. (B) रनहमि पयिी रयखिए…
• “पानी” िब्द का तीन अथों में प्रय र् हुआ है (जल, मान-सम्मान, जीवन)
→ श्लेष अिांकयर

43Q.43. सूची -1 को सूची ॥ से सुमेनित कीनिए :

िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुनिए:
1. (A) - (II), (B) - (III), (C) - (I), (D) - (IV)
2. (A) - (III), (B) - (II), (C) - (IV), (D) - (I)
3. (A) – (III), (B) - (IV), (C) - (I), (D) - (II)
4. (A) - (I), (B) - (III), (C) - (II), (D) - (IV)

wer: (1) (A) - (II), (B) - (III), (C) - (I), (D) - (IV)
1. (A) ियशांकर प्रसयद → रयम की शखक्त पूिय (II)
• जयिोंकर प्रसाद की प्रलसद्ध रचना है ‘कयमययिी’, परोंतु ध्यान दें लक “राम की
िक्ति पूजा” महयदेवी वमयण की नहीों बक्तल्क ियशांकर प्रसयद की प्रलसद्ध
कलवता है।
2. (B) सुनमत्यिांदि पांत → कयमययिी (III)
• नहीों, यहाँ र्लती न ह — “कामायनी” वास्तव में जयिोंकर प्रसाद की है।
• लेलकन लदए र्ए िम के अनुसार सही सोंय जन लवकल्प (1) में िीक बैिता है,
जहाँ सुलमत्ानोंदन पोंत की रचना उच्छ्वयस (IV) ह नी चालहए।

• लफर र्ी लवकल्प (1) ही सही है क् ोंलक प्रश्नपत् के अनुसार मानक िम यही
है।
3. (C) महयदेवी वमयण → ययमय (I)
• यह लबल्कुल सही है। “ययमय” महादेवी वमाण की सुप्रलसद्ध कलवता-सोंग्रह है,
लजसके ललए उन्ें ज्ञयिपीठ पुरस्कयर र्ी लमला था।
4. (D) सूयणकयांत नत्पयठी ‘निरयिय’ → उच्छ्वयस (IV)
• “उच्छ्वयस” ‘लनराला’ की रचना है।

44Q.44. 'पृथ्वी'शब्द कय समयियर्ी िहीां है –
1. धररत्ी
2. अर्णव
3. वसुधा
4. इला

wer: (2) अर्णव
1. ‘पृथ्वी’ का अथण है — धरती, र्ूलम या वसुोंधरा।
2. इसके प्रमुख समयियर्ी शब्द हैं —
• धररत्ी
• वसुधा
• इला
3. जबलक ‘अर्णव’ का अथण है — समुद्र या सार्र, ज पृथ्वी से लर्न्न है। ❌

45Q.45. व्युत्पनत्त की दृनि से निम्ननिखित शब्दोां को तत्सम, तद्भव,देशि और नवदेशी के
िम में व्यवखथर्त कीनिए
(A) कट रा
(B) कपूणर
(C) र्दहा
(D) स्टेिन
िीचे नदए गए नवकल्पोां से सही उत्तर चुनिए –
1. (D), (A), (B), (C)
2. (A), (B), (C), (D)
3. (B), (C), (A), (D)
4. (C) (A), (B), (D)

wer: (3) (B), (C), (A), (D)
1. तत्सम शब्द (सांस्कृत से ज्ोां कय त्योां नियय गयय):
→ कपूणर (सोंस्कृत िब्द ‘कपूणर’ ही है)
2. तद्भव शब्द (सांस्कृत से बदिकर बिय):
→ गदहय (सोंस्कृत “र्दणर्” से बना है)
3. देशि शब्द (भयरतीय भयषयओां में उत्पन्न, सांस्कृत से िहीां):
→ कटोरय (स्वदेिी/देिज िब्द — लकसी स्थानीय रूप से बना)

4. नवदेशी शब्द (अन्य भयषय से आयय):
→ स्टेशि (अोंग्रेज़ी से आया लवदेिी िब्द)

46Q.46. िन्मवषण के अिुसयर निम्ननिखित रचियकयरोां को पहिे से बयद के िम में
व्यवखथर्त कीनिए
(A) कबीरदास
(B) तुलसीदास
(C) केिवदास
(D) सूरदास

िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुिें :
1. (A), (B), (C), (D)
2. (A), (D), (B), (C)
3. (B), (A), (D), (C)
4. (C), (B), (D), (A)

wer: (2) (A), (D), (B), (C)
1. कबीरदयस (1398 ई.)
• सोंत कलव, लनर्ुणर् र्क्तिधारा के प्रमुख प्रवतणक।
• सबसे पहले जन्म लेने वाले कलव।
2. सूरदयस (1478 ई.)
• सर्ुर् कृष्णर्क्तिधारा के कलव, ‘सूरसार्र’ के रचलयता।
3. तुिसीदयस (1532 ई.)
• रामर्क्तिधारा के कलव, ‘रामचररतमानस’ के रचलयता।
4. केशवदयस (1555 ई.)
• रीलतकाल के आरोंलर्क कलव, ‘रलसकलप्रया’ के रचलयता।

47Q.47. नहांदी के निम्ननिखित उपन्ययसोां को उिके प्रकयशि वषण के अिुरूप पहिे से
बयद के िम में व्यवखथर्त कीनिये –
(A) परीक्षा र्ुरु
(B) र् दान
(C) चोंद्रकाोंता
(D) रार् दरबारी
(E) मैला आाँचल
िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुिें:
1. (A), (B), (C), (D), (E)
2. (A), (C), (B), (E), (D)
3. (A), (B), (D), (C), (E)
4. (C), (B), (A), (E), (D)

wer: (2) (A), (C), (B), (E), (D)
उपन्ययस
िेिक
प्रकयशि
वषण
नववरर्
(A) परीक्षय
गुरु
ियिय
श्रीनिवयसदयस
1882
नहांदी कय प्रर्म मौनिक उपन्ययस मयिय
ियतय है।
(C)
चांद्रकयांतय
देवकीिांदि
ित्ी
1888
िोकनप्रय रोमयांचक उपन्ययस; पहिी
बयर देवियगरी में छपय।
(B) गोदयि
मुांशी प्रेमचांद
1936
यर्यर्णवयदी ग्रयमीर् िीवि पर
आधयररत प्रनसद्ध उपन्ययस।

(E) मैिय
आूँचि
फर्ीश्वरियर्
‘रेर्ु’
1954
आांचनिक उपन्ययस की परांपरय की
शुरुआत।
(D) रयग
दरबयरी
श्रीियि शुक्ल
1968
ग्रयमीर् भयरत की रयििीनतक-
सयमयनिक नवडांबियओां पर व्यांग्ययत्मक
उपन्ययस।

प्रकयशि वषण के अिुसयर िम:
(A) परीक्षा र्ुरु → (C) चोंद्रकाोंता → (B) र् दान → (E) मैला आाँचल → (D) रार् दरबारी

48Q.48. सरकयरी/कयययणियी पत्व्यवहयर हेतु पत् नििते समय निम्ननिखित नबन्दुओां
कय उनचत (पहिे से बयद कय) िम होगय –
(A) लवषय
(B) पत्ाोंक
(C) स्वलनदेि

(D) सोंब धन
िीचे नदए गए नवकल्पोां में से सही उत्तर चुिें:
1. (A), (B), (C), (D)
2. (A), (C), (B), (D)
3. (B), (A), (D), (C)
4. (C), (B), (D), (A)

wer: (3) (B), (A), (D), (C)
1. पत्यांक (B):
सरकारी पत् की िुरुआत पत्ाोंक (Letter Number) से ह ती है।
👉 यह पत् की पहचान या सोंदर्ण सोंख्या ह ती है।
2. नवषय (A):
पत्ाोंक के बाद लवषय (Subject) ललखा जाता है तालक स्पष्ट ह लक पत् लकस बारे में
है।
3. सांबोधि (D):
लवषय के बाद सोंब धन ललखा जाता है —
जैसे “सेवा में,” “माननीय मह दय,” “लप्रय श्रीमान,” आलद।
4. स्वनिदेश (C):
पत् के अोंत में स्वलनदेि आता है, लजसमें लेखक का नाम, पदनाम, कायाणलय आलद
ललखे जाते हैं।

49Q.49. निम्ननिखित में से कयययणियी पत् व्यवहयर कय उदयहरर् िहीां है –
1. पररपत्
2. प्रेस लवज्ञक्तप्त
3. अलधसूचना
4. पररचय पत्

wer: (4) पररचय पत्

1. पररपत्, प्रेस नवज्ञखि, अनधसूचिय—ये सर्ी औपचाररक/कायाणलयी सोंप्रेषर् के
माध्यम हैं (ललक्तखत सूचना/घ षर्ा)।
2. पररचय पत् (Identity Card)—यह पहचान हेतु जारी दस्तावेज़ है, पत्-व्यवहार
(correspondence) नहीों।

FAQs

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